यहां सब कुछ संभव है। रनिंग ऑफ माइन की जगह स्टीम कोयला चाहिए मिलेगा, बस कुछ खर्च कर दीजिए। कोयला तब भी पेलोडर से ही लोड किया जाएगा, लेकिन उससे पहले मजदूरों की टोली कोयले के अंबार से चुन-चुन कर बेहतर कोयला अलग कर देगी। इसके लिए ज्यादा नहीं, बस प्रति गाड़ी 3000 रुपये रख दीजिए। सीधा सा हिसाब जीनागोड़ा डंप का है। मंजूर नहीं तो फैसला आपका। हालांकि कुछ कारोबारियों को यह भी मंजूर न हुआ। परिणाम कोयला लोड करने आए आधा दर्जन ट्रक पांच दिन खड़े रहकर लौट गए। आखिर शिकायत करें भी किससे, जब कंपनी का ही एक बाबू इस सुविधा का पैरोकार हो। यह स्थिति तब है, जबकि यहां आउटसोर्सिंग का कोयला स्टॉक किया जा रहा है। यानी ऊपरी कमाई की भी व्यवस्था कर ली गई है। ब्लॉक- 4 के बाद अब यहां भी कटमनी की व्यवस्था परवान पर है।